नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के रहने वाले 21 वर्षीय युवक सुबोध को 11 वर्ष की अवस्था में ब्लड कैंसर होने की बात पता चली। इसके बाद एम्स में उनका इलाज चला और वह कैंसर को मात देकर अपना भविष्य संवारने में जुटे हैं। कैंसर को मात देने वाले वह अकले नहीं हैं। चाइल्डहूड कैंसर सर्वाइवर दिवस के मद्देनजर एम्स में आयोजित एक कार्यक्रम में संस्थान के डाक्टरों ने दावा किया कि कैंसर से पीड़ित करीब 80 प्रतिशत बच्चे ठीक हो जाते हैं।
इसलिए बच्चों को कैंसर की बीमारी होने पर माता-पिता को घबराना नहीं चाहिए बल्कि समय पर जल्दी इलाज शुरू करना चाहिए। शुरुआती स्टेज में बीमारी का पता चलने पर कैंसर पीड़ित ज्यादातर बच्चों की जिंदगी बचाई जा सकती है। एम्स के पीडियाट्रिक विभाग के पीडियाट्रिक आंकोलाजी विभाग की प्रोफेसर डा. रचना सेठ ने कहा कि देश में हर वर्ष करीब 70 हजार बच्चे कैंसर से पीड़ित होते हैं। एम्स में हर वर्ष इलाज के लिए 400 कैंसर पीड़ित बच्चे इलाज के लिए पहुंचते हैं।
यह देखा गया है कि इलाज के लिए पहुंचने वाले करीब 80 प्रतिशत बच्चे ठीक हो जाते हैं। डा. रचना सेठ ने कहा कि बच्चों का शरीर विकसित होने की अवस्था में रहता है। इस वजह से बच्चों के शरीर पर दवा का असर ज्यादा बेहतर होता है। इस वजह से वयस्क लोगों की तुलना में बच्चों के कैंसर का इलाज का परिणाम ज्यादा बेहतर है और ज्यादातर बच्चे ठीक हो जाते हैं। डाक्टर भी यह बताकर इलाज करते हैं कि बीमारी ठीक हो जाएगी। यदि बीमारी बहुत एडवांस स्टेज हो या दोबारा ट्यूमर हो गया हो तभी जोखिम अधिक होता है। ल्यूकेमिया से पीड़ित ज्यादातर बच्चे ठीक हो जाते हैं।