- 15 जून को सबसे ज्यादा तबाही मचा सकता है बिपरजॉय तूफान

 

नई दिल्ली। ‎बिपरजॉय तूफान लगातार खतरनाक होता जा रहा है। यह तूफान अरब सागर की खाड़ी में बने गहरे विक्षोभ के चलते बना है।  बिपरजॉय तूफान और तीव्रता के साथ खतरनाक हो गया। जानकार बताते हैं ‎कि यह कई दिनों तक कहर ढा सकता है। अरब सागर में ये इस साल बना पहला तूफान बना है। लेकिन असर केरल की ओर से आने वाले मानसून पर पड़ सकता है। संभव है कि ये तूफान मानसून को यहा तो उड़ाकर ले जा सकता है या ‎फिर इसे धीमा कर सकता है। चक्रवाती तूफान कई कारण हो सकते हैं, वहीं अनेक तरह के तूफान होते हैं।


 जैसा ‎कि नाम से ही स्पष्ट है बिपरजॉय नाम से लगता है कि इसका संबंध जॉय से है लेकिन ऐसा नहीं। इस चक्रवाती तूफान को ये नाम बांग्लादेश ने दिया। बांग्ला में इस नाम का मतलब होता है डिजास्टर यानि विध्वंसक। अब ये देखा जाने लगा है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों जगहों में तूफान बन रहे हैं और तेजी से प्रचंड भी हो जा रहे हैं। ये अपनी ताकत को कई दिनों तक बनाकर रखते हैं।


हालातों को देखते हुए वैज्ञानिकों का कहना है कि अरब सागर में जो तूफान बन रहे हैं, मानसून से पहले उनके बनने की गति, समय और तीव्रता सभी में 40 फीसदी इजाफा हुआ है जबकि 20 फीसदी बढोतरी मानसून के बाद ऐसे तूफानों के बनने में आई है। पहले यहां उतने खतरनाक तूफान नहीं बनते थे, जितने अब बनने लगे हैं। भारतीय मौसम विभाग के वैज्ञानिक कहते हैं तूफानों के बनने में आई तेजी का रिश्ता समुद्र के पानी के तापमान में हो रही बढोतरी और ग्लोबल वार्मिंग है। पहले अरब सागर आमतौर पर ठंडा रहता था लेकिन अब ये गरम पानी के पूल में बदल चुका है। क्लायमेट चेंज के कारण समुद्र पहले ही गर्म हो चुके हैं। ताजातरीन अध्ययन बताते हैं कि मार्च के बाद अरब सागर 1।2 डिग्री गरम हो चुका है। ये स्थिति किसी भी तूफान के बनने और उसे ताकतवर बनाने में बहुत सहायक होती है।


अगर अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में ज्यादा तूफान बनने लगेंगे तो ये मानसूनी हवाओं पर बुरा असर डालकर तितर बितर कर देंगे। उससे भारत में हर साल आने वाले मानसून की लय और सेहत दोनों पर खराब असर पड़ेगा। ये भी हो सकता है कि मानसून का समय ही अनिश्चित हो जाए। इन दोनों स्थितियों में ना केवल हमारी कृषि पर असर पड़ेगा बल्कि बरसात से हमें नदियों, जलाशयों में जो जल मिलता है, उस पर भी बुरी तरह असर पड़े। समुद्री जल का तापमान बढ़ने पर इसके ऊपर मौजूद हवा गर्म हो जाती है,। फिर ये ऊपर की ओर उठने लगती है। उस जगह कम दबाव का क्षेत्र बनने लगता है। इसे भरने के लिए आसपास की ठंडी हवा इस ओर बढ़ती है। गर्म और ठंडी हवाओं के मिलने से जो प्रतिक्रिया होती है, वो तूफान के रूप में सामने आती है। 


जानकारी के अनुसार अब तक का सबसे विनाशकारी साइक्लोन साल नवंबर 1970 में बांग्लादेश में आया था। ग्रेट भोला साइक्लोन की वजह से लगभग 5 लाख लोगों की मौत हो गई थी। भारत में भी एक तूफान ने ऐसा ही हाहाकार मचाया था। ये 1737 में आया था, जिसे हुगली रिवर साइक्लोन के नाम से जाना जाता है। इसने लगभग साढ़े तीन लाख लोगों की जान ले ली। अमेरिका के साइक्लोन कैटरीना को भी इसी श्रेणी में रखा जाता है। साल 2005 में इसकी वजह से 2000 जानें गईं। साथ ही मकान, दफ्तर टूटने से जो नुकसान हुआ, वो लगभग 108 ‎बिलियन डॉलर था। ये दुनिया के इतिहास में सबसे ज्यादा नुकसान माना जाता है। अमेरिका दुनिया के उन चुनिंदा हिस्सों में से है जहां सबसे ज्यादा चक्रवाती तूफान आते हैं। ऐसा यहां के मौसम की वजह से है।



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