नई दिल्ली। इस बार दो दिन 3 और 4 जून को ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा रहेगी। हालांकि पंचांग भेद की वजह से इस बार दो दिन ज्येष्ठ पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस तिथि का महत्व भी उत्सव की तरह ही है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने की परंपरा है। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर किए गए दान-पुण्य और नदी स्नान से अक्षय पुण्य मिलता है, भक्तों की मनोकामनाएं जल्दी पूरी हो सकती हैं। गौरतलब है कि पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की कथा पढ़ने-सुनने की भी परंपरा है।
हिन्दी पंचांग के एक साल में 12 पूर्णिमा होती हैं, लेकिन जिस साल में अधिकमास रहता है, तब साल में कुल 13 पूर्णिमा हो जाती हैं। इस बार सावन महीने का अधिकमास रहेगा, इस कारण साल में 13 पूर्णिमा रहेंगी। शनिवार, 3 जून को सूर्योदय के समय चतुर्दशी तिथि रहेगी। इसके बाद सुबह तकरीबन 11:17 पर पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी और दिनभर रहेगी। इस कारण इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा और व्रत किया जाएगा।
इस दिन दोपहर में पितरों के लिए भी विशेष पूजा की जाएगी। इस दिन शंख में दूध भरकर भगवान कृष्ण का अभिषेक करने से जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं। शाम को तुलसी के पास दीपक लगाने से सौभाग्य और समृद्धि बढ़ने की मान्यता है। स्नान-दान की पूर्णिमा 4 जून को सूर्योदय के वक्त पूर्णिमा तिथि रहेगी। इस काराण इसी दिन स्नान-दान की ज्येष्ठ पूर्णिमा मनेगी। पुराणों के मुताबिक इस तिथि पर तीर्थ स्नान करने का विधान है। ऐसा न कर पाएं तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर नहाने से तीर्थ स्नान का पुण्य मिल जाता है।
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