- रोज भगवान शिव के इस मंदिर में देखने को मिलता है चमत्कार, यहां रात को चौसर खेलते हैं महादेव और माता पार्वती
byBejod Ratna-
0
। भारत में कई रहस्यमयी और चमत्कारी मंदिर हैं। इनके रहस्यों से लोग हैरान रह जाते हैं. यहां एक ऐसा चमत्कारी मंदिर है जिसके बारे में मान्यता है कि यहां भगवान शिव और माता पार्वती प्रतिदिन तीनों लोकों के दर्शन और विश्राम के बाद आते हैं और चौसर भी खेलते हैं। यह मंदिर खंडवा का ओंकारेश्वर मंदिर है। भगवान शिव का यह मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में चौथा ज्योतिर्लिंग है। ओंकारेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के पास स्थित है। नर्मदा नदी के मध्य ओंकार पर्वत पर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर हिंदू आस्था का केंद्र है।
ओंकार पर्वत पर स्थित है
बता दें कि भगवान शिव का यह चमत्कारी मंदिर मध्य प्रदेश के निमाड़ में है। यह खंडवा जिले में नर्मदा नदी के मध्य ओंकार पर्वत पर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि ? शब्द की उत्पत्ति ब्रह्मा जी के मुख से यहीं हुई थी। इसीलिए हर धार्मिक ग्रंथ या वेद का उच्चारण ? शब्द के साथ किया जाता है। ओंकारेश्वर की महिमा का वर्णन स्कंद पुराण, शिवपुराण और वायुपुराण जैसे पुराणों में भी मिलता है। इसके साथ ही यहां के शिवलिंग का आकार ओम के आकार का है। इसीलिए इस ज्योतिर्लिंग को ओंकारेश्वर के नाम से जाना जाता है।
भगवान शिव और माता पार्वती चौसर खेलते हैं
ऐसा माना जाता है कि यह एकमात्र ज्योतिर्लिंग है, जहां भगवान भोलेनाथ तीनों लोकों का भ्रमण करते हैं और रात्रि विश्राम करने के लिए यहां आते हैं। यहां माता पार्वती भी निवास करती हैं। मान्यता है कि रात को सोने से पहले भगवान शिव और माता पार्वती यहां चौसर खेलते हैं। इसी कारण यहां शयन आरती भी की जाती है। शयन आरती के बाद प्रतिदिन ज्योतिर्लिंग के सामने पासे का तख्ता सजाया जाता है।
चमत्कार प्रत्येक दिन होता है
इस मंदिर में रात के समय शयन आरती के बाद कोई भी गर्भगृह में नहीं जाता है। हर रात शयन आरती के बाद भगवान शिव के सामने चौसर और पासे रखे जाते हैं। सुबह जब मंदिर के दरवाजे खोले जाते हैं तो पासा उल्टा दिखाई देता है। ओंकारेश्वर मंदिर में भगवान शिव की गुप्त आरती की जाती है जहां पुजारियों के अलावा कोई भी गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर सकता है। पुजारी भगवान शिव की विशेष पूजा और अभिषेक करते हैं।
ऐसा माना जाता है कि सभी तीर्थ स्थानों के दर्शन कर ओंकारेश्वर की पूजा करने का हिंदुओं में विशेष महत्व है। यदि शिव भक्त सभी तीर्थों से जल लाकर ओंकारेश्वर में चढ़ा दें तो सभी तीर्थ पूर्ण माने जाते हैं। ओंकारेश्वर और अमलेश्वर दोनों ही शिवलिंग ज्योतिर्लिंग माने जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि पर्वतराज विंध्य ने यहां कठोर तपस्या की थी। तपस्या करने के बाद उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना की और उन्हें विंध्य क्षेत्र में बसने के लिए कहा, जिसके बाद भगवान शिव ने उनके अनुरोध को स्वीकार कर लिया। वहां एक ही ओंकार लिंग दो रूपों में विभक्त है। इसी प्रकार पार्थिव मूर्ति में स्थापित ज्योति को भगवान या अमलेश्वर ज्योतिर्लिंग कहा जाता है।