नई दिल्ली आइआइटी दिल्ली ने मानसून की भविष्यवाणी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मशीन लर्निंग (एआइ-एमएल) माडल विकसित किया है। इसके जरिये महीनों पहले मानसून के बारे में सरकार को जानकारी दी जा सकेगी। उसके हिसाब से सरकार मानसून के असर और कृषि क्षेत्र को लेकर अपनी नीतियां बना सकती है। इसे राज्य स्तर पर उपयोग की योजना भी है। इसके जरिये मौसम विभाग की तुलना में 60 प्रतिशत तक सटीक भविष्यवाणी करने का दावा किया गया है। अध्ययन करके इस वर्ष मानसून के सामान्य रहने का अनुमान लगाया गया है। आइआइटी दिल्ली ने एमआइटी यूएसए और जेएएमएसटीईसी जापान के साथ मिलकर यह माडल बनाया है। इसका अर्थ है कि 2023 देश के लिए सामान्य मानसून वाला वर्ष रहेगा। भविष्यवाणी 1901-2001 की अवधि के बीच ऐतिहासिक एआइएसएमआर डेटा, नीनो 3.4 सूचकांक डेटा और श्रेणीबद्ध हिंद महासागर डिपोल (आइओडी) डेटा के साथ प्रशिक्षित माडल का उपयोग करके की गई है। प्रो. मिश्रा ने कहा, विकसित और परीक्षण किया गया एआइ-एमएल माडल देश में मानसून की भविष्यवाणी के लिए उपयोग किए जाने वाले वर्तमान भौतिक माडल की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करने वाला साबित हुआ है। इसने वर्ष 2002 से 2022 की परीक्षण अवधि के लिए 61.9 प्रतिशत की उल्लेखनीय पूर्वानुमान सफलता दर का प्रदर्शन किया है।
