- पति की मौत के बाद विधवाओं का सहारा बनी सरकार, इस पेंशन योजना से बढ़ाया मदद का हाथ
byBejod Ratna-
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नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस है। वर्तमान समय में दुनिया में विधवाओं की संख्या लगभग 25.8 करोड़ है। भारत में इस वक्त इनकी अनुमानित संख्या करीब चार करोड़ है यानी कि कुल महिलाओं में से दस फीसदी महिलाएं। इनमें से अधिकतर या यूं कहें कि 10 में से आठ विधवाएं कमजोर आर्थिक स्थिति का सामना कर रही हैं।
वहीं अगर झारखंड की बात की जाए तो यहां 3 लाख 55 हजार विधवा हैं। इन महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा दिलाने और आर्थिक रूप से मदद करने के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना की साल 2009 में शुरुआत की गई। झारखंड में राज्य विधवा सम्मान पेंशन योजना की शुरुआत मई 2016 में की गई थी। इस योजना का लाभ उठाने के लिए सबसे पहले तो महिला की उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए और साथ ही अपने पास पति का मृत्यु प्रमाण पत्र भी होना चाहिए।
इसके अलावा आवेदनकर्ता का झारखंड का स्थायी निवासी होना भी जरूरी है। इस योजना का मकसद बस यही है कि पति की मौत के बाद उन पर आश्रित पत्नियों को अपना गुजर-बसर करने के लिए किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े। सरकार की तरफ से की जा रही मदद के बलबूते वे आत्मनिर्भर और सशक्त बन अपनी जिंदगी गुजारे। राज्य में इस योजना के तहत विधवाओं को मात्र हजार रुपये मिलते हैं। यह पैसे सीधे लाभार्थी महिला के बैंक के खाते ट्रांसफर कर दिया जाता है।
हालांकि अगर किसी महिला ने पति की मौत के बाद दूसरी शादी कर ली है तो उसे इस योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। आज महंगाई के इस जमाने में महीने के एक हजार रुपये बेहद कम है। सरकार को इस ओर गौर फरमाना चाहिए और इस राशि में कुछ इजाफा करने की दिशा में सोच-विचार करना चाहिए।