जयपुर। प्रदेश भाजपा में दो गुट है इसकी पुष्टि खुद पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भाजपा द्वारा दिल्ली में हुई मोदी शाह, नड्डा और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक में राजे नहीं पहुंची। ज्ञात रहे की राजस्थान का 2018 में हुआ विधानसभा चुनाव राजे की कप्तानी में लडा गया था फिर भी कांग्रेस ने भाजपा को महज 70 सीटों पर समेट दिया और सत्ता हासिल कर ली थी।
भाजपा के आलाकमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह अध्यक्ष जेपी नड्डा की भृकुटि राजे के नेतृत्व को स्वीकार करने में टैडी है तब और तीनों नेताओं का गुस्सा आसमान पर चढ़ गया जब राजे ने अपने समर्थकों के राजस्थान में राजे नाम का कितना प्रभाव है देव दर्शन यात्रा निकाली और प्रशंसको के छोटे मोटे आयोजनों में लाव लश्कर के साथ पहुंचकर जता दिया कि राजस्थान में तो राजे की ही जनता और प्रशंसक नेता बात पर ना नुकुर नहीं करेंगे आलाकमान ने राजे के इसी व्यवहार को देखते हुए पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां को हटाकर चित्तौडगढ़ से सांसद सीपी जोशी प्रदेश का कप्तान बना दिया।
हालांकि जोशी ने प्रदेश की टीम अभी अपने मुताबिक घोषित नहीं कर पाई है मगर जोशी की अध्यक्ष पद पर ताजपोशी कर यह तो बता ही दिया कि राजे को राज्य की राजनीति से आलाकमान हासिए पर रखना चाहता है जिसके आधार में कांग्रेस के सचिन पायलट द्वारा राजे काल में हुए तथाकथित भ्रष्टाचार को केन्द्रित किया गया है गहलोत सरकार को विधायकों की आंकडे बाजी में बचाने का परदे के पीछे राजे पर हाथ बताया जा रहा है राजे पर केन्द्रित नेतृत्व की भृकुटि टेडी होने के कारणों में सरकार रिपीट नही हुई दूसरा पायलट द्वारा भ्रष्टाचार का आरोप लगाना जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समूची कांग्रेस को ही भ्रष्टाचार के मामले में कटघरे में खड़ा करने से नहीं चूकते क्योंकि जिस भ्रष्टाचार पर वे कांग्रेस मुक्त भारत बनाना चाहते है
कर्नाटक में कांग्रेस ने भाजपा सीएम पर 40 प्रतिशत सीएम वाला लेवल चस्पा कर चुनाव जीत लिया है कांग्रेस सरकार बनने से यह पूरी तरह सिद्ध हो गया कि प्रदेश देश की जनता भ्रष्टाचार पर किसी भी पार्टी से समझौता करने वाली नहीं है शायद इसीलिए भाजपा आलकमान ने 2023 में होने वाले चुनावी राज्यों के लिए अलग रणनीति बनाई है और जनता के दिल में उतरने वाले मुद्दे चिन्हित किए है जिसकी कमान किसी एक व्यक्तित्व को नहीं राज्य के सांसदों, विधायकों, पूर्व मंत्रियों, संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों को सौपी गई है
इसके साथ ही पीएम नरेन्द्र मोदी ने अजमेर दौरे के दौरान हीं केन्द्र की कांग्रेस काल में 80 प्रतिशत कमीशन खाने का आरोप भी लगाया ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नहीं चाहते है कि चुनाव वाले राज्य राजस्थान में भी भाजपा को कांग्रेस किसी भी सूरत में भ्रष्टाचार पर नहीं घेर सके शायद यही कारण है कि राजस्थान में वसुंधरा राजे को अभी टीम राजस्थान के अंदर कोई बड़ा पद नहीं दिया गया है यह तो तय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा जायेगा मगर जिस प्रकार अन्य नेतागणों को राज्य की चुनावी रणनीति के तहत जिम्मेदारी आवंटित की है
और राजे को अभी तक हासिए पर रखा गया है भाजपा ने रणनीति के नेताओं को संभागवार जिम्मेदारी दी है जिनमें जयपुर संभाग में उपनेता प्रतिपक्ष सतीश पूनियां, जयपुर ग्रामीण सांसद राज्चवर्धन सिंह राठौड, विधायक नरपत सिंह रावजी, सांसद घनश्याम तिवाडी, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी, रामचरण बोहरा, विधायक व पूर्व मंत्री कालीचरण सराफ, पूर्व मंत्री सुभाष महरिया, केन्द्रीय मंत्री यादव, भरतपुर संभाग में राज्यसभा सांसद किरोडी लाल मीणा, सांसद जसकौर मीणा, मनोज राजौरिया, पूर्व प्रदेशाअध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी, कोटा संभाग में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, झालावाड़ बारां में सांसद दुष्यंत सिंह, प्रदेश महामंत्री व विधायक मदन दिलावर, जोधपुर संभाग में केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, कैलश चौधरी, पूर्व प्रदेशाअध्यक्ष ओम प्रकाश माथुर, बीकानेर संभाग मे नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड, सांसद राहुल कस्वां, केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, सांसद निहालचंद मेघवाल, अजमेर संभाग में पूर्व मंत्री व विधायक वासदुवे देवनानी, अनिला भेदल, सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया, उदयपुर संभाग में प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी सांसद कनकमल कटारा, पूर्व श्रीचंद कृपलानी, इतना ही नहीं बडे नेताओं की यात्राओं और सभाओं के लिए नाम तय किए गए है जिन नेताओं के नाम तय किए गए है